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खुद की आवाज़ से लड़ते रहे करन जौहर: ‘लड़की जैसी आवाज़’ कहने वालों से मिले तानों ने बदली ज़िंदगी

News Desk
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07 May 2025
04:57 AM
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खुद की आवाज़ से लड़ते रहे करन जौहर: ‘लड़की जैसी आवाज़’ कहने वालों से मिले तानों ने बदली ज़िंदगी


>मशहूर फिल्म निर्माता करन जौहर ने हाल ही में अपने जीवन के उस दौर का खुलासा किया जब उन्हें अपनी आवाज़ के कारण समाज की आलोचना और भेदभाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि किस तरह “लड़की जैसी आवाज़” के तानों ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया, और कैसे उन्होंने सालों तक अपनी आवाज़ को ‘मर्दाना’ बनाने के लिए संघर्ष किया।


>करन ने बताया कि एक वक्त पर वह सार्वजनिक भाषण की क्लासेस लेने गए, जहां प्रशिक्षकों ने उनकी आवाज़ सुनने के बाद उन्हें चेताया, “आपको समाज में बहुत दिक्कत होगी क्योंकि आपकी आवाज़ लड़कियों जैसी है। आपको बारिटोन लाना होगा। हम आपको वॉयस एक्सरसाइज़ देंगे।” इस टिप्पणी ने उन्हें इतना झकझोर दिया कि उन्होंने दो से तीन साल तक लगातार वॉयस ट्रेनिंग ली। उन्होंने यह भी बताया कि वह इस क्लास को लेकर इतने शर्मिंदा थे कि अपने पिता यश जौहर से झूठ बोलते रहे कि वह कंप्यूटर क्लास कर रहे हैं।


>‘शर्म से झूठ बोला, अब पछतावा है’


>करन कहते हैं, “मैंने तीन साल तक बारिटोन पाने के लिए मेहनत की। सिर्फ आवाज़ ही नहीं, उन्होंने मुझे चलना, बैठना और मर्दाना दिखना भी सिखाया। आज मैं कभी किसी को ये सलाह नहीं दूंगा। मैं कहूंगा – जैसे हो वैसे रहो।”


>परिवार बना सहारा, समाज ने किया किनारा


>करन जौहर के मुताबिक उनके माता-पिता, विशेषकर उनकी मां हीरू जौहर और पिता यश जौहर ही वह ‘सेफ स्पेस’ थे जहां उन्हें स्वीकार किया गया। यश जौहर चाहते थे कि करन एक अभिनेता बनें, पर समाज की रूढ़िवादी सोच ने करन को लगातार अपने भीतर संकोच और शर्मिंदगी का बोझ दे दिया।


>‘आज किसी को नहीं बदलने दूंगा’


>आज जब करन खुद एक सफल निर्माता-निर्देशक हैं और लाखों युवाओं के आदर्श हैं, तो वह साफ कहते हैं, “अगर कोई लड़का किसी खास तरह से चलता है या बोलता है, तो मैं कहूंगा – वैसे ही रहो। खुद को किसी के लिए मत बदलो।”


>एक निर्माता, जिसने हिंदी सिनेमा को दीं नई ऊंचाइयां


>1998 में कुछ कुछ होता है से निर्देशन की दुनिया में कदम रखने वाले करन जौहर ने कभी खुशी कभी ग़म, माई नेम इज़ खान, ऐ दिल है मुश्किल और रॉकी और रानी की प्रेम कहानी जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं। लेकिन अब वह न सिर्फ कहानियां रचते हैं, बल्कि समाज के उन अनकहे पहलुओं पर भी खुलकर बात करते हैं जिन पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है।

 

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