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जब सायरन बजेगा, तब सिर्फ सेना नहीं, हर नागरिक बनेगा रक्षक — लखनऊ में मॉक ड्रिल के ज़रिए 5000 लोगों को सिखाया जा रहा है जंग जैसे हालात में जीना और बचाना!

ब्लैकआउट से बमबारी तक: लखनऊ में युद्ध जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी, 5000 नागरिकों को सिखाया जाएगा बचाव का पाठ
News Desk
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06 May 2025
11:19 PM
1 min read
जब सायरन बजेगा, तब सिर्फ सेना नहीं, हर नागरिक बनेगा रक्षक — लखनऊ में मॉक ड्रिल के ज़रिए 5000 लोगों को सिखाया जा रहा है जंग जैसे हालात में जीना और बचाना!
हाइलाइट्स
ब्लैकआउट से बमबारी तक: लखनऊ में युद्ध जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी, 5000 नागरिकों को सिखाया जाएगा बचाव का पाठ


>अगर कल को युद्ध जैसे हालात बन जाएं तो क्या लखनऊ तैयार है? क्या आम आदमी जानता है कि बमबारी या ब्लैकआउट के दौरान कैसे खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जाए? इन सवालों का जवाब ढूंढने और आम नागरिकों को तैयार करने के लिए लखनऊ में बुधवार शाम को दो बड़े मॉक ड्रिल आयोजित किए जा रहे हैं।


>देश को चाहिए जागरूक नागरिक, सिर्फ सैनिक नहीं


>केंद्र सरकार के निर्देश पर पूरे देश में नागरिक सुरक्षा की तैयारियां तेज़ हो गई हैं। उसी के तहत लखनऊ में शाम 7 बजे से 9 बजे तक बीकेटी और नागपुर क्षेत्रों में युद्ध जैसी स्थिति को सजीव रूप में दिखाते हुए लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। लगभग 5000 आम नागरिकों को यह सिखाया जाएगा कि आपदा आने पर कैसे खुद को सुरक्षित रखें, घायलों को कैसे मदद दें, और किस तरह के प्राथमिक एक्शन जान बचा सकते हैं।

सिविल डिफेंस का एक्शन प्लान


>सिविल डिफेंस के चीफ कोऑर्डिनेटर अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान न केवल ब्लैकआउट की सिचुएशन पैदा की जाएगी, बल्कि लाइव फायर और केमिकल अटैक जैसे हालात भी दर्शाए जाएंगे। लोगों को सिखाया जाएगा कि घायलों को कैसे प्राथमिक इलाज दें, आग लगने पर किस तरह से रेस्क्यू करें, और किस केमिकल पर किस सामग्री का उपयोग करें।


>“हम हर महीने नागरिकों को ट्रेन करते हैं, लेकिन अब समय है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसमें भाग लें और खुद को आपदा के लिए तैयार करें,” उन्होंने कहा।

महिलाएं बनीं रेस्क्यू की कमांडर


>सिविल डिफेंस की महिला वर्कर ज्योति खरे ने बताया कि टीम वर्क के तहत हर महिला को एक जिम्मेदारी दी जाती है — घायलों को बाहर निकालना, फर्स्ट एड देना, और ब्लैकआउट के दौरान लोगों को शेल्टर पोजिशन में लाना। मॉक ड्रिल में 50 से ज़्यादा महिलाएं सक्रिय रूप से भाग लेंगी, जिनमें से कई की उम्र 50 वर्ष से अधिक है, लेकिन देशसेवा का जोश किसी युवा से कम नहीं।


>“हमें हर महीने ट्रेनिंग मिलती है ताकि आग हो, बम फटे या केमिकल लीक हो — किसी भी स्थिति में हम तैयार रहें,” उन्होंने जोश के साथ कहा।


>सायरन बजा तो समझिए सतर्क रहने का समय आ गया


>एक सिविल डिफेंस अधिकारी, ने बताया कि मॉक ड्रिल के दौरान लोगों को सायरन की पहचान कराई जाएगी। यह चेतावनी संकेत होगा कि कोई आपात स्थिति है। इसके बाद वॉलंटियर्स सक्रिय होंगे, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करेंगे और फर्स्ट एड से लेकर शेल्टर तक की व्यवस्था करेंगे।

पुलिस-सेना नहीं, आम जनता के बीच से तैयार होंगे रक्षक


>मंगलवार को पुलिस लाइन में इसकी रिहर्सल की गई। खास बात यह रही कि वहां न पुलिस थी, न सेना। हर मोर्चा संभाले थे सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स — यानी आम नागरिक, जिन्होंने देशसेवा को अपना धर्म मान लिया है। बुज़ुर्ग महिलाएं भी युवाओं को प्रेरित करती नजर आईं।


>देशभक्ति अब सिर्फ सीमा पर नहीं, मोहल्ले की गलियों में भी ज़रूरी है


>मॉक ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं, बल्कि एक संदेश है — “तैयार रहें, क्योंकि संकट पूछकर नहीं आता।” इस अभियान का मकसद सिर्फ ट्रेनिंग देना नहीं, बल्कि नागरिकों के मन में ज़िम्मेदारी और आत्मविश्वास जगाना है। हर घर में एक प्रशिक्षित सदस्य होना आज की जरूरत है।

 

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