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दिल्ली में किसके बढ़ेंगे बिजली बिल और किसे मिलेगी राहत? DERC के फैसले से साफ हुई तस्वीर

DERC ने बिजली कंपनियों को FPPAS बढ़ाने की मंजूरी दी, सब्सिडी लेने वाले उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ।
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Bureau News Desk
13 Jun 2026
12:45 PM
1 min read
दिल्ली में किसके बढ़ेंगे बिजली बिल और किसे मिलेगी राहत? DERC के फैसले से साफ हुई तस्वीर
हाइलाइट्स
DERC ने बिजली कंपनियों को FPPAS बढ़ाने की मंजूरी दी, सब्सिडी लेने वाले उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ।

 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 500 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल महंगा हो सकता है। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग  ने बिजली वितरण कंपनियों को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद कुछ श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 1 प्रतिशत से 3.30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

 

DERC के फैसले का सबसे अधिक असर गैर-सब्सिडी वाले घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। विशेष रूप से वे उपभोक्ता जो हर महीने 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं, उन्हें बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, 0 से 200 यूनिट और 200 से 400 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

 

दिल्ली सरकार की पूर्ण या 50 प्रतिशत बिजली सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है। ऐसे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं।

 

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और कोयले की कीमतों में वृद्धि के कारण बिजली खरीद की लागत बढ़ी है। इसके चलते बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार वसूलने की अनुमति दी है।

 

DERC ने दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों को अप्रैल 2026 के लिए 16 से 18 प्रतिशत मासिक पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट शुल्क लगाने की मंजूरी भी दी है। इसके चलते 500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली की प्रभावी दरों में 1 प्रतिशत से 3.30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।

 

ऊर्जा संकट के बीच बिजली कंपनियों पर लागू 10 प्रतिशत सरचार्ज की अधिकतम सीमा (कैप) को भी समाप्त कर दिया गया है। इससे भविष्य में गैर-सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं के बिल पर अतिरिक्त असर पड़ने की संभावना बढ़ सकती है।

 

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