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“हम यहां मर रहे हैं”, दिल्ली में प्रदूषण पर फूटा ग़ुस्सा, इंडिया गेट पर सड़कों पर उतरे लोग

Delhi News: दिल्ली में प्रदुषण एक ऐसा मुद्दा है जिसपे हर सरकार के दावे आसमानी साबित होते है पर ज़मीन पर हकीकत उसके ठीक विपरीत ऐसे में आज एक बार फिर इंडिया गेट से उठी आवाज़ ने सरकार की नीतियों, आंकड़ों और दावे-वायदों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
News Desk
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09 Nov 2025
06:51 PM
1 min read
“हम यहां मर रहे हैं”, दिल्ली में प्रदूषण पर फूटा ग़ुस्सा, इंडिया गेट पर सड़कों पर उतरे लोग
हाइलाइट्स
Delhi News: दिल्ली में प्रदुषण एक ऐसा मुद्दा है जिसपे हर सरकार के दावे आसमानी साबित होते है पर ज़मीन पर हकीकत उसके ठीक विपरीत ऐसे में आज एक बार फिर इंडिया गेट से उठी आवाज़ ने सरकार की नीतियों, आंकड़ों और दावे-वायदों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


>दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार भयावह स्थिति में पहुंचता जा रहा है। ज़हरीली हवा, दमघोंटू वातावरण और रिकॉर्ड तोड़ एयूआई स्तरों के बीच रविवार को राजधानी की जनता सड़कों पर उतर आई। इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार पर नीतियाँ बनाने में विफलता और आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही भीड़ में छात्रों और युवा संगठनों की बड़ी संख्या मौजूद थी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दिल्ली में हवा इतनी खराब हो चुकी है कि आम नागरिक सांस लेते-लेते मर रहा है, लेकिन सरकार कागज़ों और डेटा प्रेज़ेंटेशन में व्यस्त है।


>प्रदूषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने पर कई छात्रों और नागरिकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में जेएनयूएसयू अध्यक्ष, संयुक्त सचिव, आइसा डीयू पदाधिकारी और कई छात्राएँ शामिल हैं। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों को अज्ञात स्थान पर ले जाया जा रहा है, जिससे गुस्सा और डर दोनों का माहौल बन गया।


>एक प्रदर्शनकारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा दिल्ली में AQI ख़तरनाक स्तर पर है। हम यहां मर रहे हैं और सरकार आंकड़े छुपा रही है। शांतिपूर्ण विरोध की भी अनुमति नहीं। आम जनता दम तोड़ रही है और सरकार मजदूरों को बिहार भेजने में लगी है। उनका कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ हवा की नहीं, जनजीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की लड़ाई है।


>प्रदर्शनकारियों ने सरकार के अस्थायी उपायों पर भी सवाल उठाए। डेटा सेंटर पर पानी छिड़कना, क्लाउड सीडिंग, ये सब दिखावा है। हमें स्थायी समाधान चाहिए। जनता भी सोई हुई है, तमाशा देख रही है, लेकिन आवाज़ नहीं उठा रही। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर दिल्ली में बार-बार अलर्ट जारी हो रहे हैं, स्कूल बंद किए जा रहे हैं, और निर्माण गतिविधियों पर रोक लग रही है, लेकिन ज़मीनी सुधार की रफ्तार बेहद धीमी है।

 

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