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आईआईटी इंजीनियर की पहल: यूपी की 300 गोशालाओं में लगेंगे बायोगैस प्लांट

आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज गुप्ता यूपी की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट लगाने की परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन होगा।
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Bureau News Desk
07 Mar 2026
08:29 PM
1 min read
आईआईटी इंजीनियर की पहल: यूपी की 300 गोशालाओं में लगेंगे बायोगैस प्लांट
हाइलाइट्स
आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र यशराज गुप्ता यूपी की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट लगाने की परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खाद का उत्पादन होगा।

उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में नई पहल शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और उनकी टीम राज्य की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। इस परियोजना के माध्यम से गोबर और गोमूत्र से स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

 

गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार इस पहल का उद्देश्य गोसंरक्षण को वैज्ञानिक और आर्थिक दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर मॉडल में बदलना है। उन्होंने बताया कि पंचगव्य आधारित उत्पादों को उद्योग से जोड़कर युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।

 

इस परियोजना की अगुवाई आईआईटी खड़गपुर से पढ़े यशराज गुप्ता कर रहे हैं। उन्होंने एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी का लगभग दो करोड़ रुपये का वार्षिक पैकेज छोड़कर गोसंरक्षण से जुड़े इस प्रोजेक्ट को चुना है। यशराज का कहना है कि तकनीक के सही उपयोग से गो आधारित अर्थव्यवस्था ग्रामीण आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

 

परियोजना की शुरुआत जालौन जिले से की जा रही है, जहां गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित कर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और बिजली उत्पादन की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। सफल प्रयोग के बाद इसी मॉडल को प्रदेश के 300 से अधिक गोआश्रय स्थलों में लागू करने की योजना है।

 

यशराज और उनकी टीम ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ के औद्योगिक उपयोग पर प्रशिक्षण भी देंगे। इसमें गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी से तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बनाने पर भी काम किया जाएगा। गोसेवा आयोग के अनुसार इस मॉडल के माध्यम से गोआश्रय स्थलों को पशुधन संरक्षण के साथ ऊर्जा और जैविक खाद उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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