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2016 में मिला था गिराने का आदेश, 10 साल बाद उसी बिल्डिंग में चली गईं 15 जिंदगियां

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद सामने आए दस्तावेजों से खुला पुराना रिकॉर्ड, चार अफसर सस्पेंड, एसआईटी जांच शुरू और कई सवालों के जवाब तलाश रही प्रशासनिक मशीनरी।
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Bureau News Desk
23 Jun 2026
11:29 AM
1 min read
2016 में मिला था गिराने का आदेश, 10 साल बाद उसी बिल्डिंग में चली गईं 15 जिंदगियां
हाइलाइट्स
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद सामने आए दस्तावेजों से खुला पुराना रिकॉर्ड, चार अफसर सस्पेंड, एसआईटी जांच शुरू और कई सवालों के जवाब तलाश रही प्रशासनिक मशीनरी।

 

लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके की जिस इमारत से उठता धुआं सोमवार को पूरे शहर को दिखाई दे रहा था, उसकी कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं है। 15 युवा जिंदगियां खत्म हो गईं। कई परिवारों की दुनिया बदल गई। और अब, इस त्रासदी के बाद एक दशक पुरानी फाइलें फिर से खुल रही हैं।

 

जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड बताते हैं कि इसी भवन के खिलाफ साल 2016 में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि बाद में भवन स्वामियों की आपत्तियों के बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया। अब हादसे के बाद फिर से उसी भवन के निर्माण, स्वीकृतियों और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू हुई है।

 

यह खबर भी पढ़े - लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा फैसला, सीएम योगी ने बनाई दो सदस्यीय एसआईटी - घटनास्थल पहुंचे राजनाथ सिंह

 

अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित एमएस/102/डी भवन का इतिहास करीब चार दशक पुराना है। 1980 में इसका आवंटन हुआ। 2005 में विक्रय विलेख निष्पादित हुआ। 2013 में नए मालिक आए। 2014 में नामांतरण और मानचित्र स्वीकृत हुआ। लेकिन 2016 में इस भवन को लेकर अवैध निर्माण का मामला सामने आया और ध्वस्तीकरण आदेश जारी हुआ।

 

हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव की मां बेटे से मिलने बिसवां से लखनऊ आई थीं। लेकिन जब वह पहुंचीं, तब तक इमारत आग की चपेट में आ चुकी थी। परिजन मदद की गुहार लगाते रहे। लेकिन उनकी आंखों के सामने ही बेटा जिंदगी की जंग हार गया। पोस्टमार्टम गृह में कई परिवारों का दर्द एक जैसा था। किसी ने बेटा खोया। किसी ने भाई। किसी ने अपना भविष्य।

 

पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बिल्डिंग मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम रद्द कर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। दो सदस्यीय SIT गठित की गई है। जांच रिपोर्ट सात दिनों में मांगी गई है।

 

हादसे के बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

अब जिन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं...

 

क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था?

 

क्या भवन के उपयोग में बदलाव हुआ था?

 

क्या सभी स्वीकृतियां वैध थीं?

 

क्या पुराने विवादों का इस मामले से कोई संबंध है?

 

इन सभी पहलुओं की जांच SIT और प्रशासनिक टीमें कर रही हैं।

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