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नगर निगम की रस्सी बनी डिलीवरी ब्वॉय की मौत का फंदा

रस्सी बनी मौत की वजह: फ्लिपकार्ट डिलीवरी ब्वॉय की दर्दनाक मौत से मचा बवाल, नगर निगम पर लापरवाही का आरोप
News Desk
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16 Jul 2025
08:23 AM
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नगर निगम की रस्सी बनी डिलीवरी ब्वॉय की मौत का फंदा
हाइलाइट्स
रस्सी बनी मौत की वजह: फ्लिपकार्ट डिलीवरी ब्वॉय की दर्दनाक मौत से मचा बवाल, नगर निगम पर लापरवाही का आरोप


>लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने नगर निगम की लापरवाही को उजागर कर दिया। मंगलवार दोपहर वृंदावन सेक्टर-9 स्थित मामा चौराहा के पास पेड़ काटने के दौरान बीच सड़क पर बिना सूचना रस्सी बांधने से एक युवक की जान चली गई। मृतक की पहचान 24 वर्षीय अनुज कश्यप के रूप में हुई, जो मोहनलालगंज के गोपालखेड़ा गांव का निवासी था और फ्लिपकार्ट में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर रहा था।


>डिलीवरी पर निकले अनुज की रस्सी में फंसकर मौत, बैरिकेडिंग नहीं थी


>परिजनों के अनुसार अनुज 15 जुलाई की दोपहर डिलीवरी देने निकला था। नगर निगम की ओर से पेड़ की कटाई-छंटाई हो रही थी और सड़क पर सिर्फ रस्सी बांधकर रास्ता रोक दिया गया था, पर न कोई चेतावनी बोर्ड था और न कोई बैरिकेडिंग। अनुज बाइक पर सवार था और रस्सी में फंसकर बुरी तरह गिर पड़ा, जिससे घातक चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।


>गांव में शव पहुंचते ही उग्र हुआ माहौल, सड़क पर प्रदर्शन


>बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद जब अनुज का शव गांव पहुंचा, तो परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गोपालखेड़ा पुल पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि लापरवाह कर्मियों पर एफआईआर हो और पीड़ित परिवार को मुआवजा और नौकरी दी जाए।


>करीब डेढ़ घंटे तक सड़क जाम रहने के बाद एसीपी और एसडीएम के समझाने पर लोग शांत हुए और शव को घर ले गए, लेकिन प्रदर्शन घर के बाहर जारी रहा। प्रदर्शनकारी नगर निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे।


>FIR दर्ज, आर्थिक मदद और नौकरी का आश्वासन


>अनुज के भाई सोनू कश्यप की शिकायत पर पुलिस ने नगर निगम के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसी बीच अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, अरुण कुमार गुप्ता और उद्यान अधीक्षक शशिकांत गोपालखेड़ा पहुंचे और पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की तात्कालिक आर्थिक सहायता दी।


>ललित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपये की सहायता के लिए भी पत्र भेजा जा चुका है। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी, और जांच समिति के माध्यम से दोषी कर्मियों पर कार्रवाई की बात भी कही गई है।

 

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