उत्तर प्रदेश के नोएडा में हालिया मजदूर प्रदर्शनों और कुछ स्थानों पर हुई घटनाओं के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता में औद्योगिक इकाइयों की आउटसोर्सिंग एजेंसियों और संविदाकारों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई।
बैठक में औद्योगिक शांति बनाए रखने और शासन की गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां और संविदाकार उद्योग संचालन तथा रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने श्रमिकों के साथ मिलकर शांति व्यवस्था बनाए रखें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी एजेंसी या उसके कार्मिकों द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी एजेंसी की भी होगी। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करते हुए लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
श्रमिकों के वेतन और नियमों के पालन को लेकर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। डीएम ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अकुशल श्रमिक के लिए 13,690 रुपये, अर्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिक के लिए 16,868 रुपये प्रति माह न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संविदाकार इन मानकों का पूर्ण पालन करें और श्रमिकों के खातों में पूरा वेतन हस्तांतरित करें।
बैठक में यह भी कहा गया कि उद्योग, श्रमिक और नियोजक एक-दूसरे के पूरक हैं। औद्योगिक गतिविधियों के प्रभावित होने से सभी पक्षों के साथ-साथ प्रदेश के समग्र विकास पर असर पड़ता है।
जिलाधिकारी ने सभी से अपील की कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से बचें तथा आपसी सहयोग और विश्वास के साथ कार्य करते हुए औद्योगिक शांति बनाए रखें। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया कि श्रमिकों और नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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