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आरबीआई के इन तीन बड़े कदम से अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ेगा भारतीय रुपये का दबदबा

Business News: भारतीय रिज़र्व बैंक के तीन अहम कदमों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये का दबदबा बढ़ने जा रहा है, जिससे विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता घटेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पारदर्शी संदर्भ दरें और विशेष रुपया वॉस्ट्रो खाता (SRVA) जैसे उपायों की घोषणा की है।
News Desk
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01 Oct 2025
05:41 AM
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आरबीआई के इन तीन बड़े कदम से अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ेगा भारतीय रुपये का दबदबा
हाइलाइट्स
Business News: भारतीय रिज़र्व बैंक के तीन अहम कदमों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये का दबदबा बढ़ने जा रहा है, जिससे विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता घटेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पारदर्शी संदर्भ दरें और विशेष रुपया वॉस्ट्रो खाता (SRVA) जैसे उपायों की घोषणा की है।


>भारतीय रुपये का प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी नजर आने लगा है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद यह ऐतिहासिक कदम उठाने की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना और भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रमुख मुद्रा के रूप में स्थापित करना है।


>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की मुद्राओं के लिए पारदर्शी संदर्भ दरें (Reference Rates) स्थापित की जाएंगी, जिससे रुपये का इस्तेमाल द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार में आसान हो जाएगा। इसके अलावा, कॉरपोरेट बॉन्ड और वाणिज्यिक पत्रों में भारतीय रुपये में निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष रुपया वॉस्ट्रो खाता (Special Rupee Vostro Account - SRVA) का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।


>भारतीय रुपये में निवेश और व्यापार को बढ़ावा
SRVA एक ऐसा खाता है जिसे विदेशी बैंक भारतीय बैंक के साथ खोलते हैं। इसके माध्यम से विदेशी कंपनियां और बैंक सीधे भारतीय रुपये (INR) में अंतरराष्ट्रीय व्यापार का निपटान कर सकती हैं। यह प्रणाली अमेरिकी डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता को कम करती है, जिससे वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव और मुद्रा संकट से बचाव संभव होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत का चालू खाता घाटा भी नियंत्रित रहेगा और विदेशी निवेश आकर्षित होगा।


>तीन मुख्य कदम:


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  1. द्विपक्षीय व्यापार के लिए रुपये में लोन – भूटान, नेपाल और श्रीलंका के प्रवासी नागरिक अब भारतीय रुपये में व्यापारिक लेनदेन और लोन प्राप्त कर सकेंगे।

  2. विशेष रुपया वॉस्ट्रो खाता (SRVA) का प्रोत्साहन – विदेशी बैंक सीधे भारतीय रुपये में निवेश और भुगतान कर सकते हैं।

  3. पारदर्शी संदर्भ दरें (Reference Rates) स्थापित करना – प्रमुख व्यापारिक मुद्राओं के लिए स्पष्ट दरों का निर्धारण कर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये की विश्वसनीयता बढ़ाई जाएगी।


>आरबीआई का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में लाभकारी है। पहले डॉलर और यूरो जैसी मुद्राओं पर निर्भरता ज्यादा थी, जिससे विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और चालू खाता घाटे का खतरा रहता था। अब भारतीय रुपये का इस्तेमाल बढ़ने से विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा और भारत की वित्तीय स्थिरता मजबूत होगी।


>मौद्रिक नीति और आर्थिक पूर्वानुमान
तीन दिवसीय MPC बैठक में रेपो रेट में बदलाव के अलावा, आरबीआई ने देश की जीडीपी का अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है। मुद्रास्फीति का अनुमान 2.6 प्रतिशत रखा गया है। दूसरी तिमाही में यह 1.8 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 1.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4 प्रतिशत रहने की संभावना है। 2026-27 की पहली तिमाही में मुद्रास्फीति 4.5 प्रतिशत अनुमानित है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का बाह्य क्षेत्र मजबूत है और केंद्रीय बैंक रुपये की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखेगा।

 

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