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गांव से IIT तक: छोड़ी विदेश की नौकरी और बन गए टेक आइकन - श्रीधर वेम्बू की कहानी

Shridhar Vembu: एक छोटे से तमिलनाडु के गांव से निकलकर दुनिया के तकनीकी मंच पर छा जाने वाले शख्स की कहानी कुछ ऐसी है कि सुनकर आप दंग रह जाएंगे। जानिए कैसे श्रीधर वेम्बू ने आरामदायक विदेश की नौकरी छोड़कर भारत का अपना व्हाट्सएप बनाने का अनोखा फैसला लिया।
News Desk
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07 Oct 2025
03:06 AM
1 min read
गांव से IIT तक: छोड़ी विदेश की नौकरी और बन गए टेक आइकन - श्रीधर वेम्बू की कहानी
हाइलाइट्स
Shridhar Vembu: एक छोटे से तमिलनाडु के गांव से निकलकर दुनिया के तकनीकी मंच पर छा जाने वाले शख्स की कहानी कुछ ऐसी है कि सुनकर आप दंग रह जाएंगे। जानिए कैसे श्रीधर वेम्बू ने आरामदायक विदेश की नौकरी छोड़कर भारत का अपना व्हाट्सएप बनाने का अनोखा फैसला लिया।


>सोशल मीडिया पर इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है भारतीय मैसेजिंग ऐप अराटाई (Arattai)। सिर्फ कुछ ही दिनों में यह ऐप इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग इसे "भारत का व्हाट्सएप" कहने लगे हैं। लेकिन इस ऐप के पीछे की कहानी उतनी ही प्रेरक है जितनी इसकी सफलता। इस ऐप के निर्माता हैं जोहो कॉरपोरेशन (Zoho Corporation) के संस्थापक श्रीधर वेम्बू, जिन्होंने अपने करियर और शिक्षा के सफर से साबित किया कि प्रतिभा और दूरदर्शिता से दुनिया में भारत का नाम रोशन किया जा सकता है।


>IIT और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की पढ़ाई


>श्रीधर वेम्बू का जन्म 1968 में तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज और होशियार थे। उन्होंने IIT मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया और इसके बाद अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी हासिल की। इसके बाद उन्होंने क्वालकॉम (Qualcomm) जैसी अमेरिकी कंपनी में काम किया, जहाँ उन्होंने वायरलेस टेक्नोलॉजी पर शोध किया।


>विदेश छोड़ भारत लौटने का साहसिक कदम


>बहुत से लोग विदेश में आराम और भव्य जीवन जीने के लिए बसना पसंद करते हैं, लेकिन श्रीधर ने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने अमेरिका की आरामदायक जिंदगी छोड़ भारत लौटने का फैसला किया। उनका उद्देश्य था — भारत में एक स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी बनाना, जो दुनिया के बड़े टेक कंपनियों से टक्कर ले सके।


>गांव से शुरू की वैश्विक कंपनी


>श्रीधर ने भारत लौटने के बाद बेंगलुरु या हैदराबाद जैसी बड़ी मेट्रो सिटी में ऑफिस बनाने की बजाय तमिलनाडु के तेनकासी जिले के एक छोटे से गांव को चुना। उन्होंने वहीं जोहो कंपनी का ऑफिस बनाया और गांव के युवाओं को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग देना शुरू किया।
आज भी वे साइकिल से ऑफिस जाते हैं और मानते हैं: “तकनीक केवल शहरों में नहीं, गांवों में भी विकसित हो सकती है, यदि वहां के युवाओं को सही मौके मिलें।”


>जोहो से अराटाई तक: भारत का डिजिटल क्रांति मॉडल


>साल 1996 में श्रीधर वेम्बू ने AdventNet नाम से अपनी कंपनी शुरू की, जो बाद में Zoho Corporation बनी।
जोहो ने भारत को विश्वस्तरीय SaaS (Software as a Service) कंपनी दी, जो माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करती है।


>साल 2021 में, जोहो ने लॉन्च किया ‘Arattai’, एक स्वदेशी मैसेजिंग ऐप।
यह ऐप पूरी तरह भारतीय तकनीक पर आधारित है और डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज से इसे “Made in India WhatsApp” कहा जा रहा है।


>सरकार और जनता का समर्थन


>केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अराटाई ऐप की सराहना की और जनता से स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाने की अपील की।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ तीन दिनों में ऐप के रोजाना साइन-अप 3,000 से बढ़कर 3.5 लाख तक पहुंच गए।


>फोर्ब्स इंडिया 2024 की लिस्ट में श्रीधर वेम्बू भारत के 39वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं।
उनकी कुल संपत्ति 5.85 बिलियन डॉलर (लगभग ₹51,900 करोड़ रुपये) आंकी गई।
भारत सरकार ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 2021 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया।


>श्रीधर वेम्बू केवल एक टेक उद्यमी नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर डिजिटल सोच के प्रतीक हैं।
उन्होंने साबित किया कि अगर दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता हो तो गांव से भी ग्लोबल इनोवेशन जन्म ले सकता है।
आज अराटाई सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी स्वाभिमान की पहचान बन चुका है।

 

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