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एक नाम, 6 नौकरी , 9 साल तक चली सरकारी सैलरी की लूट

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा झटका सामने आया है, जब अर्पित सिंह नामक शख्स ने छह जिलों में फर्जी दस्तावेज बनाकर नौ साल तक 4.5 करोड़ रुपये की सैलरी हड़पी
News Desk
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09 Sep 2025
05:59 AM
1 min read
एक नाम, 6 नौकरी , 9 साल तक चली सरकारी सैलरी की लूट
हाइलाइट्स
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया का सबसे बड़ा झटका सामने आया है, जब अर्पित सिंह नामक शख्स ने छह जिलों में फर्जी दस्तावेज बनाकर नौ साल तक 4
5 करोड़ रुपये की सैलरी हड़पी


>उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जिसमें अर्पित सिंह नामक व्यक्ति ने छह अलग-अलग जिलों में फर्जी दस्तावेज़ बनाकर सरकारी नौकरी पाई और 9 साल तक राज्य सरकार से कुल 4.5 करोड़ रुपये से अधिक की सैलरी व सरकारी सुविधाएं लीं। यह खुलासा मानव संपदा पोर्टल पर डिजिटल रजिस्ट्रेशन के दौरान हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर लखनऊ पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि CBI भी पहले से ही गहराई से जांच कर रही है।


>जानकारी के मुताबिक, यह घोटाला 2016 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) द्वारा आयोजित एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती के दौरान हुआ। जांच में पाया गया कि अर्पित सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह का नाम 403 उम्मीदवारों की सूची में था, लेकिन इसी नाम व पहचान का उपयोग कर छह अलग-अलग व्यक्तियों ने बलरामपुर, फर्रुखाबाद, रामपुर, बांदा, अमरोहा और शामली जिलों में नौकरी हासिल कर ली। हर महीने लगभग 69,595 रुपये वेतन मिलने से कुल वेतन 9 साल में लगभग 4.5 करोड़ रुपये पहुंच गया।


>मानव संपदा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन होते ही यह फर्जीवाड़ा सामने आया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशक (पैरामेडिकल) डॉ. रंजना खरे ने वजीरगंज थाने में आरोपित के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत FIR दर्ज कराई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में इस मामले का जिक्र करते हुए साफ कहा कि यह घोटाला सपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था, जब भर्तियों में सिफारिश और धांधली का चलन था। अब योगी सरकार ने हर स्तर पर पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित कर इसे रोकने का संकल्प लिया है।


>अखिलेश यादव पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में यह बड़ा फर्जीवाड़ा पूरी तरह से सरकारी तंत्र की चूक से संभव हो पाया था। मुख्यमंत्री ने CBI को मामले की गहराई से जांच कर दोषियों को सजा दिलाने के निर्देश दिए हैं।

 

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