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पेपर लीक पर अब लगेगा पक्का ताला - सरकार का सख्त कानून होगा लागू

News Desk
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23 Jul 2025
06:20 AM
1 min read
पेपर लीक पर अब लगेगा पक्का ताला - सरकार का सख्त कानून होगा लागू


>उत्तर प्रदेश की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों, पेपर लीक और नकल को पूरी तरह खत्म करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की सभी परीक्षाओं में एक नहीं, चार अलग-अलग सेट में प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे। इस फैसले को लेकर कैबिनेट ने संशोधन अध्यादेश 2025 को मंजूरी दे दी है, जिसे जल्द ही विधानमंडल में पेश किया जाएगा।


>क्या बदलेगा अब?


>अब तक UPPSC की परीक्षाओं में एक ही सेट का प्रश्नपत्र होता था, जिससे पेपर लीक और नकल की आशंका बनी रहती थी। कई बार अभ्यर्थियों के बीच एक ही प्रश्नपत्र बंटने से नकल माफिया को खेल खेलने का मौका मिल जाता था। लेकिन अब चार सेट में प्रश्नपत्र तैयार करने से हर परीक्षार्थी को अलग-अलग पेपर मिलेगा। इससे नकल की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।


>सरकार ने सिर्फ परीक्षा फॉर्मेट ही नहीं बदला है, बल्कि प्रश्नपत्र छपाई से जुड़े मुद्रकों (प्रिंटर्स) पर भी कड़ा शिकंजा कस दिया है। यदि छपाई के दौरान कोई लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है, तो मुद्रक प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी। यह सख्ती उस समय और भी जरूरी हो जाती है जब लीक की शुरुआत अक्सर छपाई प्रक्रिया से होती है।


>सरकार की योजना में सिर्फ चार सेट की व्यवस्था ही नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को हर स्तर पर सुरक्षित बनाने की तैयारी है:


    >
  • सभी प्रश्नपत्र होंगे कोडेड और गोपनीय

  • छपाई, वितरण और मूल्यांकन के दौरान कड़ी निगरानी

  • चारों सेट का गुणवत्तापरक मूल्यांकन सुनिश्चित

  • परीक्षा नियामकों को दिए जाएंगे नए दिशा-निर्देश


>यह सारी व्यवस्थाएं मिलकर एक निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली को आकार देंगी।


>पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की घटनाओं ने सरकार की साख पर चोट की है। हर साल लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता था। सरकार के इस नए कानून से उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन क्या नकल माफिया इस नई व्यवस्था को भी चकमा देने में कामयाब हो पाएंगे? यह आने वाले वक्त में साफ़ होगा। फिलहाल, परीक्षा प्रक्रिया को दुरुस्त करने की दिशा में यह एक साहसिक और स्वागतयोग्य पहल है।

 

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