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मायावती के मिशन-2027 के लिए बसपा में बड़ा फेरबदल, कई दिग्गज नेताओं की छुट्टी

UP News: बसपा के अंदर शुरू हुई “मिशन-2027” की बड़ी सर्जरी -- मायावती ने पुराने चेहरों को हटाकर नया दांव चला
News Desk
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22 Oct 2025
11:43 PM
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मायावती के मिशन-2027 के लिए बसपा में बड़ा फेरबदल, कई दिग्गज नेताओं की छुट्टी
हाइलाइट्स
UP News: बसपा के अंदर शुरू हुई “मिशन-2027” की बड़ी सर्जरी -- मायावती ने पुराने चेहरों को हटाकर नया दांव चला


>उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आगामी विधानसभा चुनाव “मिशन-2027” की तैयारियों को धार देने के लिए संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। पश्चिमी यूपी से लेकर बरेली मंडल तक कई प्रमुख चेहरों को बदला गया है। मायावती के इस कदम को पार्टी की नई रणनीति और जमीनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


>पश्चिम यूपी के बड़े नेता पद से हटाए गए
मेरठ-सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के निवर्तमान मुख्य प्रभारी पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली और पूर्व सांसद गिरीश चंद जाटव को उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। इनकी जगह अब आगरा के विक्रम सिंह जाटव और अमरोहा के जाफर मलिक को नई जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही, शमसुद्दीन राइन को बरेली मंडल का मुख्य प्रभारी बनाया गया है। नए प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाएं और ‘बहुजन मिशन-2027’ अभियान को गति दें।


>बसपा प्रमुख मायावती पिछले कुछ समय से पार्टी की गिरी पकड़ को वापस पाने के लिए जमीनी स्तर पर बदलाव कर रही हैं। पार्टी अब गांव-गांव तक पहुंच बनाने, दलित, ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम समुदायों को एकजुट करने में जुटी है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों के दुष्प्रचार का जवाब तथ्यों के साथ देने के निर्देश दिए हैं।


>बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को डिजिटल कैंपेन और युवा मतदाताओं से जुड़ने की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने और युवा वर्ग में अपनी वैचारिक पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रही है।


>2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का वोट शेयर 12.88% पर सिमट गया था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह घटकर 9.39% तक पहुंच गया। बसपा को इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। इसके बाद मायावती ने खुलकर कहा था कि “हमारे वोट तो दूसरों को ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन हमें किसी का वोट नहीं मिलता।” इस बयान ने ही संकेत दे दिया था कि मायावती अब गठबंधन की राजनीति से दूर रहकर ‘संगठन आधारित पुनरुद्धार मॉडल’ पर काम करने जा रही हैं।

 

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