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दिल्ली का प्रदूषण रोकने के लिए नया सिस्टम, रियल-टाइम डेटा से होगी निगरानी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से प्रदूषण स्रोतों की लगातार निगरानी, डेटा विश्लेषण और मैकेनिकल स्वीपर्स की जीपीएस मॉनिटरिंग होगी।
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Bureau News Desk
05 Oct 2026
07:44 PM
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दिल्ली का प्रदूषण रोकने के लिए नया सिस्टम, रियल-टाइम डेटा से होगी निगरानी
हाइलाइट्स
- दिल्ली में प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर विकसित किया गया है।
- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार सेंटर में 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था है।
- निगरानी में एआई आधारित कैमरों और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- मैकेनिकल स्वीपर्स की जीपीएस मॉनिटरिंग भी आईसीसीसी के जरिए की जा रही है।

दिल्ली में प्रदूषण की निगरानी और उससे जुड़ी जमीनी कार्रवाई को तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई व्यवस्था तैयार की गई है। राजधानी में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर लगातार नजर रखने और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को एकीकृत मंच के रूप में विकसित किया गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस व्यवस्था से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसमें 24 घंटे निगरानी, एआई आधारित कैमरे और रियल-टाइम डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही मैकेनिकल स्वीपर्स की जीपीएस के जरिए निगरानी भी की जा रही है।

दिल्ली में प्रदूषण की रियल-टाइम निगरानी और जमीनी कार्रवाई के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी आईसीसीसी को एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए प्रदूषण से जुड़े विभिन्न स्रोतों की लगातार निगरानी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सेंटर को इस तरह विकसित किया गया है कि प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों को एक जगह पर देखा और उनका विश्लेषण किया जा सके। सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था का इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, आईसीसीसी के माध्यम से दिल्ली में प्रदूषण की 24 घंटे निगरानी की जा रही है। इस निगरानी व्यवस्था में रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मतलब है कि उपलब्ध आंकड़ों को लगातार देखा और उनका विश्लेषण किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इसका उद्देश्य प्रदूषण से संबंधित गतिविधियों की निगरानी को एकीकृत करना और आवश्यकता के अनुसार जमीनी कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है।

नई व्यवस्था में एआई आधारित कैमरों को भी शामिल किया गया है। इन कैमरों के माध्यम से निगरानी प्रक्रिया को तकनीकी आधार दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एआई आधारित कैमरे और डेटा विश्लेषण आईसीसीसी की निगरानी व्यवस्था का हिस्सा हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन कैमरों की संख्या, तैनाती वाले स्थानों या उनके जरिए चिन्हित किए जाने वाले प्रदूषण स्रोतों की विस्तृत सूची नहीं दी गई है।

आईसीसीसी की व्यवस्था में रियल-टाइम डेटा विश्लेषण को महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। डेटा के माध्यम से प्रदूषण से संबंधित जानकारी को लगातार देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि निगरानी के साथ उपलब्ध डेटा के आधार पर जमीनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निगरानी और कार्रवाई के बीच समय कम करना बताया गया है।

दिल्ली में सड़कों की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले मैकेनिकल स्वीपर्स की निगरानी भी इस प्रणाली के जरिए की जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, मैकेनिकल स्वीपर्स की जीपीएस मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे इन वाहनों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए तकनीकी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी में मैकेनिकल स्वीपर्स की कुल संख्या या उनकी जीपीएस निगरानी के विस्तृत संचालन से संबंधित आंकड़े साझा नहीं किए गए हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने निगरानी के आधार पर समयबद्ध और प्रभावी जमीनी कार्रवाई की जरूरत बताई। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इसी उद्देश्य से तकनीक और डेटा आधारित निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। आईसीसीसी को इसी व्यवस्था के तहत एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है।

आईसीसीसी के जरिए प्रदूषण से जुड़े विभिन्न स्रोतों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसमें रियल-टाइम डेटा, एआई आधारित कैमरे और अन्य तकनीकी निगरानी प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इससे प्रदूषण से संबंधित स्थिति की निगरानी करने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने में मदद मिल रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में ऐसे स्रोतों की विस्तृत श्रेणीवार सूची नहीं दी गई है, जिनकी निगरानी आईसीसीसी से की जा रही है।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी में आईसीसीसी को एक दशक से अधिक समय से प्रतीक्षित प्रणाली बताया गया है। अब इसे प्रदूषण की निगरानी और जमीनी कार्रवाई के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इस व्यवस्था में निगरानी, डेटा विश्लेषण और वाहनों की जीपीएस आधारित निगरानी को तकनीकी प्रणाली के साथ जोड़ा गया है।

प्रदूषण नियंत्रण के संदर्भ में आईसीसीसी का मुख्य पहलू निगरानी और कार्रवाई को एक ही प्रणाली से जोड़ना है। सरकार के अनुसार, पहले प्रदूषण से जुड़ी जानकारी की निगरानी के बाद जमीनी स्तर पर कार्रवाई की जरूरत होती है। नई व्यवस्था में रियल-टाइम डेटा और तकनीकी निगरानी के जरिए इस प्रक्रिया को अधिक एकीकृत बनाने का प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका इस्तेमाल लगातार सतर्कता बनाए रखने और जरूरत के अनुसार समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर तकनीक और डेटा आधारित निगरानी की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आईसीसीसी में 24 घंटे निगरानी, एआई आधारित कैमरे, रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और मैकेनिकल स्वीपर्स की जीपीएस मॉनिटरिंग की जा रही है। उनके अनुसार, दिल्ली को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए निगरानी के साथ समयबद्ध जमीनी कार्रवाई भी जरूरी है।

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