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पेट्रोल-डीजल पर भी लगेगा जीएसटी, सीटीआई ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

महंगाई से राहत देने की अपील, सीटीआई के अनुसार - पेट्रोल पर 42% और डीजल पर 32% तक टैक्स का बोझ।
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Bureau News Desk
23 May 2026
11:22 AM
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पेट्रोल-डीजल पर भी लगेगा जीएसटी, सीटीआई ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
हाइलाइट्स
महंगाई से राहत देने की अपील, सीटीआई के अनुसार - पेट्रोल पर 42% और डीजल पर 32% तक टैक्स का बोझ।

 

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन सीटीआई ने केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में शामिल करने की मांग की है। इस संबंध में सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जल्द निर्णय लेने की अपील की है।

 

सीटीआई का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले भारी टैक्स के कारण आम आदमी, व्यापारी और उद्योग जगत पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। संगठन के अनुसार यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाया जाता है तो देशभर में ईंधन की कीमतों में समानता आएगी और लोगों को महंगाई से राहत मिल सकती है।

 

बृजेश गोयल ने कहा कि 22 मई तक के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल का वास्तविक मूल्य 66.29 रुपये प्रति लीटर था। इस पर 11.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी और 16.03 रुपये वैट लगाया जा रहा है, जबकि डीलर मार्जिन 4.42 रुपये है। वहीं डीजल का वास्तविक मूल्य 67.36 रुपये प्रति लीटर बताया गया, जिस पर 7.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी और 13.39 रुपये वैट लगाया जा रहा है। डीजल पर डीलर मार्जिन 3.03 रुपये बताया गया है।

 

सीटीआई के मुताबिक वर्तमान समय में पेट्रोल पर वास्तविक मूल्य के मुकाबले करीब 42 प्रतिशत और डीजल पर लगभग 32 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जा रहा है। संगठन ने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

 

संगठन के अनुसार तेलंगाना में पेट्रोल सबसे महंगा है क्योंकि वहां पेट्रोल पर करीब 35.2 प्रतिशत वैट लगाया जाता है। वहीं अंडमान-निकोबार में पेट्रोल और डीजल पर केवल 1 प्रतिशत वैट होने के कारण वहां ईंधन सबसे सस्ता बताया गया है।

 

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में बृजेश गोयल ने कहा कि वर्ष 2017 में जीएसटी लागू करते समय ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की अवधारणा पेश की गई थी। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल अब भी GST से बाहर हैं, जिसके चलते राज्य सरकारें अपने-अपने हिसाब से वैट वसूल रही हैं और हर राज्य में ईंधन की कीमतें अलग-अलग हैं।

 

सीटीआई ने केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल पर लागू एक्साइज ड्यूटी और वैट व्यवस्था की समीक्षा करते हुए इन्हें जीएसटी के दायरे में शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे देशभर में ईंधन की कीमतों में एकरूपता आ सकती है और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। 

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