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2016 में गिराने का आदेश हुआ था, फिर 15 लोगों की जान लेने वाली इमारत कैसे बची रही?

15 लोगों की मौत के बाद राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने योगी सरकार, फायर सिस्टम और 2016 के ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर कई सवाल उठाए, SIT जांच से आगे जवाबदेही की मांग की।
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Bureau News Desk
23 Jun 2026
02:12 PM
1 min read
2016 में गिराने का आदेश हुआ था, फिर 15 लोगों की जान लेने वाली इमारत कैसे बची रही?
हाइलाइट्स
15 लोगों की मौत के बाद राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने योगी सरकार, फायर सिस्टम और 2016 के ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर कई सवाल उठाए, SIT जांच से आगे जवाबदेही की मांग की।

 

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद अब चर्चा सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं है। एक पुराना सवाल फिर सामने आ गया है -यदि जिस इमारत को वर्षों पहले खतरनाक मानते हुए गिराने का आदेश दिया गया था, वह आखिर इतने वर्षों तक कैसे खड़ी रही? इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सरकार और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।

 

संजय सिंह ने कहा कि यदि वर्ष 2016 में भवन को खतरनाक मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था, तो यह जानना जरूरी है कि वह आदेश आखिर लागू क्यों नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आदेश वापस हुआ तो उसके पीछे क्या कारण थे और किन लोगों की भूमिका रही।

 

राज्यसभा सांसद ने कहा कि हर बड़े हादसे के बाद जांच समितियां बना दी जाती हैं, लेकिन लोगों को सिर्फ रिपोर्ट नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय होते देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई हुई होती तो 15 परिवारों को अपने प्रियजनों को नहीं खोना पड़ता।

 

यह खबर भी पढ़े - 2016 में मिला था गिराने का आदेश, 10 साल बाद उसी बिल्डिंग में चली गईं 15 जिंदगियां

 

संजय सिंह ने राहत और बचाव कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवारों के अनुसार लोग मदद के लिए फोन करते रहे, लेकिन राहत कार्य समय पर नहीं पहुंच सका।

 

संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे प्रदेश के फायर विभाग की समीक्षा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह जांच होनी चाहिए कि किन जिलों में पर्याप्त संसाधन हैं, कहां उपकरणों की कमी है और विभिन्न घटनाओं में दमकल की गाड़ियां कितनी देर में पहुंचीं।

 

उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो केवल निलंबन पर्याप्त नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

घटना के बाद घोषित आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सहायता जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जिम्मेदारी किसकी थी और आगे क्या कार्रवाई होगी।

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