महाराष्ट्र में एक बैंक के साथ हुई 49.39 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच ने ग्रेटर नोएडा तक पुलिस को पहुंचा दिया। गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा ग्रेटर नोएडा स्थित बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं।
बीटा-दो कोतवाली पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान घोड़ी बछेड़ा गांव निवासी प्रीतम और साहिबाबाद निवासी सन्नी ठाकुर के रूप में हुई है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। मामले में अन्य संभावित आरोपियों और धन के लेन-देन की भी जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, 10 सितंबर 2025 को महाराष्ट्र स्थित साउथ इंडिया बैंक के साथ 49.39 लाख रुपये की साइबर धोखाधड़ी हुई थी। शिकायत गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान पता चला कि ठगी की गई राशि तीन अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित की गई थी। इनमें से 14 लाख 90 हजार रुपये ग्रेटर नोएडा के एक बैंक खाते में भेजे गए थे। यही सुराग आगे की जांच का आधार बना।
प्रकरण की जांच बीटा-दो कोतवाली पुलिस को सौंपी गई। पुलिस टीम ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि जिस खाते में 14.90 लाख रुपये भेजे गए थे, वह घोड़ी बछेड़ा गांव निवासी प्रीतम के नाम पर संचालित था। इसके बाद पुलिस ने प्रीतम को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान प्रीतम ने बताया कि उसके बैंक खाते में यह रकम साहिबाबाद निवासी सन्नी ठाकुर के कहने पर ट्रांसफर कराई गई थी। इसके बदले उसे कुछ धनराशि भी दी गई थी।
जांच के आधार पर पुलिस ने सन्नी ठाकुर को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, सन्नी गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित वैभव खंड क्षेत्र में श्री रियलटर्स नाम से कार्यालय संचालित करता है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्रीतम कथित तौर पर ठगी की रकम में से करीब 9.50 लाख रुपये खर्च कर चुका था। पुलिस ने शेष 5 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, बाकी धनराशि और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।
प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि मामले में अन्य व्यक्तियों की भूमिका, धन के प्रवाह और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
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