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हिंदू-मुस्लिम खून देकर बचाते हैं एक-दूसरे की जान, नफरत की राजनीति खतरनाक: सपा नेता एसटी हसन

संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट पर सपा नेता डॉ. एसटी हसन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम को बांटने वाली राजनीति देश को कमजोर करेगी जबकि इंसानियत आज भी दोनों को जोड़ती है।
News Desk
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30 Aug 2025
02:57 AM
1 min read
हिंदू-मुस्लिम खून देकर बचाते हैं एक-दूसरे की जान, नफरत की राजनीति खतरनाक: सपा नेता एसटी हसन
हाइलाइट्स
संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट पर सपा नेता डॉ
एसटी हसन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम को बांटने वाली राजनीति देश को कमजोर करेगी जबकि इंसानियत आज भी दोनों को जोड़ती है।

संभल हिंसा की न्यायिक जांच आयोग की 450 पन्नों की रिपोर्ट ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। इस पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को महज हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से देखना सही नहीं है।

सपा नेता ने कहा कि पलायन का कारण सिर्फ डर नहीं बल्कि कारोबार और रोज़गार भी हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आंकड़ों की सही जांच और जनसंख्या से तुलना के बाद ही रिपोर्ट पर यकीन किया जा सकता है।

“हिंदू भाई मुसलमान को खून देते हैं और मुसलमान भाई हिंदू भाई को खून देते हैं। हम इंसानियत से जुड़े हैं, लेकिन राजनीति ने हमारे बीच नफरतें बढ़ाकर दूरियां पैदा कर दी हैं।” – एसटी हसन

उन्होंने कहा कि देश में आज भी इंसानियत जिंदा है, लोग एक-दूसरे की जान बचाने के लिए आगे आते हैं। लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए पैदा की गई खाई राष्ट्र के लिए खतरनाक है।

सपा नेता ने कहा कि हिंदुस्तान की दोनों बड़ी आबादियों के बीच नफरत पैदा करने से देश कमजोर होगा और यही हमारे दुश्मनों की साजिश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नफरत की राजनीति से महाशक्ति बनने का सपना अधूरा रह जाएगा।

जब उनसे पूछा गया कि रिपोर्ट में आतंकी संगठनों की भूमिका का भी जिक्र है, तो उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा है तो पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कार्रवाई करे और ऐसे तत्वों को जेल भेजे। उन्होंने सरकार से मांग की कि माहौल को निडर और सुरक्षित बनाया जाए ताकि लोग बिना किसी भय के जी सकें।

पूर्व सांसद ने कहा कि संभल हमेशा से मुस्लिम बाहुल्य इलाका रहा है। ऐसे में आंकड़ों का हवाला देकर सांप्रदायिकता फैलाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग रोज़गार और कारोबार के लिए बाहर जाते हैं, इसे डर का माहौल बताना पूरी सच्चाई नहीं है।

 

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