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पश्चिम के बाद अब पूर्व के चौधरी बने यूपी भाजपा अध्यक्ष

UP BJP President: उत्तर प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया है। सात बार के सांसद चौधरी की नियुक्ति को ओबीसी और खासकर कुर्मी वोटबैंक को साधने की रणनीति से जोड़ा जा रहा है। जानें उनका राजनीतिक सफर, जातीय समीकरण और यूपी में संभावित फेरबदल।
News Desk
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13 Dec 2025
02:25 PM
1 min read
पश्चिम के बाद अब पूर्व के चौधरी बने यूपी भाजपा अध्यक्ष
हाइलाइट्स
UP BJP President: उत्तर प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष चुन लिया है। सात बार के सांसद चौधरी की नियुक्ति को ओबीसी और खासकर कुर्मी वोटबैंक को साधने की रणनीति से जोड़ा जा रहा है। जानें उनका राजनीतिक सफर, जातीय समीकरण और यूपी में संभावित फेरबदल।


>भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने नए अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम तय कर चुकी है। ये चयन निर्विरोध होने तय माना जा रहा है।संगठनात्मक चुनाव की देखरेख कर रहे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल,विनोद तावड़े और प्रदेश चुनाव अधिकारी महेंद्रनाथ पांडेय इस प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। पार्टी नेतृत्व लंबे समय से राज्य में ओबीसी प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, और चौधरी की नियुक्ति उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।


>कौन हैं पंकज चौधरी?
पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश के महराजगंज से सात बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ था, जब 1989 में वे गोरखपुर नगर निगम के सदस्य बने। 1991 तक वे निगम में कार्यरत रहे और इस दौरान एक वर्ष तक उप महापौर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।


>वे 1990 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और समय के साथ पार्टी संगठन में अपनी मजबूत पकड़ स्थापित की। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी कैबिनेट में वित्त राज्य मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने विभिन्न वित्तीय मामलों और मंत्रालय से संबंधित कार्यों का संचालन किया। 


>चौधरी का पारिवारिक राजनीतिक बैकग्राउंड भी मजबूत माना जाता है। उनकी मां उज्ज्वल चौधरी महराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया है।


>जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति
पंकज चौधरी कुर्मी समुदाय से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश में ओबीसी वर्ग का एक प्रभावशाली हिस्सा है। राज्य में ओबीसी मतदाताओं में संख्या के आधार पर कुर्मी दूसरे स्थान पर आते हैं, जबकि यादव समुदाय सबसे बड़ा समूह है।


>कुर्मी वोटर प्रदेश की लगभग 30 से 40 विधानसभा सीटों को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से तराई, काशी, गोरखपुर, अवध और रोहिलखंड क्षेत्रों में। सूत्रों के अनुसार, पार्टी आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले गैर-यादव ओबीसी वोटों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
संतोष गंगवार के राज्यपाल बनाए जाने के बाद पार्टी में कुर्मी चेहरे के रूप में पंकज चौधरी की अहमियत और बढ़ गई है। बीजेपी पिछले कुछ वर्षों से अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (सोनेलाल) के साथ गठबंधन कर कुर्मी वोटबैंक को साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है।


>क्षेत्रीय संतुलन और संभावित फेरबदल
पार्टी सूत्रों का कहना है कि चौधरी की नियुक्ति के बाद अब प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए कैबिनेट में फेरबदल की संभावना है। अनुमान है कि केंद्रीय यूपी से प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। आउट गोइंग राज्य उपाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के दोबारा कैबिनेट में शामिल होने की चर्चा है। वहीं, बीजेपी नेता साध्वी निरंजन ज्योति को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों ने अनुसार यह भी मन जा रहा है कि प्रदर्शन के आधार पर कुछ मंत्रियों को पद से हटाया जा सकता है।

 

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