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अब मोबाइल पर मिलेगी तालाब और मौसम की जानकारी, यूपी सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाई नई योजना

मत्स्य विभाग के नए पोर्टल के जरिए योजनाओं का लाभ होगा आसान, तालाबों की निगरानी, मौसम और ऑक्सीजन की जानकारी भी तकनीक के जरिए उपलब्ध कराने की तैयारी
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Bureau News Desk
16 Jul 2026
05:52 PM
1 min read
अब मोबाइल पर मिलेगी तालाब और मौसम की जानकारी, यूपी सरकार ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाई नई योजना
इमेज सोर्स - लखनऊ संवाददाता आर के पाल
हाइलाइट्स
मत्स्य विभाग की योजनाओं के लिए नया डिजिटल पोर्टल शुरू होगा।
प्रदेश में मोती की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी।
तिलैपिया और पंगेशियस मछलियों के बीज का स्थानीय उत्पादन होगा।
एआई आधारित प्रणाली से तालाबों की निगरानी की तैयारी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में नई पहल की है। मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं को एकीकृत रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए नया डिजिटल पोर्टल शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में मोती की खेती को बढ़ावा देने, मछलियों के बीज का स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और मत्स्य पालन में तकनीक के उपयोग को विस्तार देने की योजना भी सामने आई है।

लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में मत्स्य क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने बताया कि विभाग की योजनाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे मत्स्य पालकों को विभिन्न सेवाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।

मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब मोती की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए मत्स्य निगम और संबंधित फेडरेशन के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उनका कहना था कि इससे मत्स्य क्षेत्र में आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।

डॉ. संजय निषाद ने बताया कि तिलैपिया और पंगेशियस जैसी मछलियों के बीज का उत्पादन उत्तर प्रदेश में ही शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे इन प्रजातियों के बीज के लिए अन्य राज्यों और बांग्लादेश पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ने से मत्स्य पालन गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई।

मत्स्य मंत्री के अनुसार विभाग मत्स्य पालन को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके माध्यम से मत्स्य पालकों को तालाबों की स्थिति, पानी में ऑक्सीजन की कमी, मौसम में बदलाव और बाढ़ जैसी संभावित परिस्थितियों की समय रहते जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य मत्स्य पालकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराना है, ताकि वे आवश्यक कदम उठा सकें।

प्रेस वार्ता में मंत्री ने बताया कि मत्स्य पालकों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा बीमा, शिक्षा, प्रशिक्षण, बेटियों के विवाह, इलाज और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित सुविधाओं के लिए भी अलग-अलग पोर्टल शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

डॉ. संजय निषाद ने बताया कि प्रदेश की मत्स्य मंडियों और एक्वा फिश पार्कों के विकास पर भी विभाग काम कर रहा है। उनका कहना था कि इन सुविधाओं को मजबूत करने से मत्स्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

 

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