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मानसिक बीमारी पर भेदभाव दूर करने की अपील, अंबेडकरनगर में चला जागरूकता अभियान

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Bureau News Desk
11 Oct 2026
12:37 PM
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मानसिक बीमारी पर भेदभाव दूर करने की अपील, अंबेडकरनगर में चला जागरूकता अभियान
सोर्स - संवाददाता रवि दुबे

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को समझने और प्रभावित लोगों के प्रति समाज का नजरिया बदलने के उद्देश्य से अंबेडकरनगर में जागरूकता अभियान चलाया गया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस पहल में लोगों को मानसिक बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाने और समय पर उपचार के महत्व से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

आशीर्वाद फाउंडेशन की ओर से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत जिला अस्पताल और आशीर्वाद मेडिकल सेंटर में कार्यक्रम किए गए। इस दौरान नंदा आर्टिस्ट ग्रुप के कलाकारों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया।

नाटक के माध्यम से कलाकारों ने बताया कि मानसिक बीमारी भी अन्य बीमारियों की तरह एक स्वास्थ्य समस्या है। समय पर इसकी पहचान और उचित उपचार से प्रभावित व्यक्ति को मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और इस विषय पर खुलकर बात करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

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नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें गंभीरता से समझना चाहिए। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मनोचिकित्सक डॉ. जे. के. वर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने मानसिक बीमारियों के लक्षणों को पहचानने और समय पर उचित उपचार कराने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

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उन्होंने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य को भी सामान्य स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने और इससे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सही जानकारी हासिल करने का संदेश दिया गया। इसका उद्देश्य लोगों को मानसिक बीमारी के प्रति जागरूक करना और आवश्यकता पड़ने पर उपचार लेने के लिए प्रेरित करना था।

जागरूकता कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य मानसिक रोगों से प्रभावित लोगों के प्रति समाज में मौजूद भेदभाव और गलत धारणाओं को दूर करना रहा। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि ऐसे लोगों को अलग-थलग करने के बजाय उन्हें समझने, सहयोग देने और उपचार के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर जानकारी की कमी और सामाजिक झिझक के कारण कई बार लोग अपनी परेशानी साझा करने से बचते हैं। कार्यक्रम में इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।

अभियान के जरिए लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति को सहयोग और उचित उपचार की जरूरत होती है। परिवार, समाज और स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।

जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी.एन. यादव उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. फौजिया शरीफ ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

प्रबंधक हर्षित गुप्ता के प्रबंधन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मरीज, तीमारदार, नर्सिंग के छात्र-छात्राएं और स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम के माध्यम से अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य और समय पर उपचार से जुड़ी जानकारी पहुंचाई गई।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों और विद्यार्थियों की मौजूदगी के बीच मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समस्याओं को समझने और जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।

आयोजकों के अनुसार, डॉ. जे. के. वर्मा के नेतृत्व में पिछले एक सप्ताह से जनपद के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना, समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना और मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना है। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

अभियान में नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम का उपयोग किया गया, ताकि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संदेश आम लोगों तक सरल तरीके से पहुंच सकें। इसके जरिए मानसिक बीमारी को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के रूप में समझने और प्रभावित व्यक्तियों के साथ सहयोगपूर्ण व्यवहार करने पर जोर दिया गया।

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