गाजियाबाद के संजयनगर क्षेत्र में 22 वर्षीय ऑटो चालक राजकुमार की मौत के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और इलाज को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। युवक की मां ने आरोप लगाया है कि घायल बेटे की सूचना मिलने पर जब वह अस्पताल पहुंचीं तो उन्हें वहां से भगा दिया गया। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता तो बेटे की जान बच सकती थी। वहीं पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज में पुलिस की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है।
राजकुमार की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। पीछे उसकी आठ माह की गर्भवती पत्नी और वृद्ध मां हैं, जिनके सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
मृतक की मां चिंता देवी के अनुसार, रविवार शाम करीब चार बजे पुलिस ने उन्हें बेटे के घायल होने की सूचना दी। सूचना मिलने के बाद वह संजयनगर स्थित संयुक्त जिला अस्पताल पहुंचीं। उनका आरोप है कि अस्पताल में उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और वहां से वापस भेज दिया गया।
उन्होंने बताया कि बाद में शाम करीब छह बजे उन्हें जानकारी मिली कि बेटे को जीटीबी अस्पताल भेजा गया है। हालांकि पोस्टमार्टम के बाद ही उन्हें यह पता चला कि उनके बेटे की मौत हो चुकी थी। चिंता देवी का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिलता तो शायद उनका बेटा जीवित होता। हालांकि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि युवक को जीटीबी अस्पताल रेफर नहीं किया गया था।
पुलिस के अनुसार, राजकुमार रविवार को शराब के नशे की हालत में संजयनगर स्थित पिंक बूथ पर पहुंचा था। इसी दौरान उसने बूथ के शीशे पर दोनों हाथ मारे, जिससे कांच टूट गया और उसके हाथ गंभीर रूप से घायल हो गए। टूटे हुए कांच के टुकड़े हाथों में धंसने से लगातार रक्तस्राव होता रहा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव उसकी मौत का कारण बना।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि पूरे मामले की जांच महिला अपराध शाखा की एसीपी सुचिता सिंह को सौंपी गई है। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में पुलिस की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है।
पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में घटना का समय दोपहर 2 बजकर 19 मिनट दर्ज है। इसके लगभग नौ मिनट बाद, 2 बजकर 28 मिनट पर पुलिस की लैपर्ड बाइक मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस का कहना है कि उनकी सूचना पर ही 2 बजकर 36 मिनट पर एंबुलेंस भी घटनास्थल पर पहुंच गई थी।
मृतक के परिजनों ने इलाज में देरी और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस शुरुआती जांच के आधार पर अपने स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही से इनकार कर रही है। ऐसे में अब मामले की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान सभी प्रक्रियाओं का पालन निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं।
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