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राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आज बड़ा दिन, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई नए पहलू

सूत्रों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट में व्यवस्थागत कमियों, चढ़ावे की गणना प्रक्रिया और कुछ व्यक्तियों की भूमिका से जुड़े बिंदुओं का उल्लेख हो सकता है; सरकार को आज सौंपी जा सकती है रिपोर्ट।
Bureau
Bureau News Desk
15 Jul 2026
11:33 AM
1 min read
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में आज बड़ा दिन, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई नए पहलू
हाइलाइट्स
एसआईटी आज सरकार को अंतिम जांच रिपोर्ट सौंप सकती है।
रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई बिंदुओं का उल्लेख होने की संभावना।
सूत्रों के अनुसार हुंडीवार गणना प्रणाली लागू करने की सिफारिश की जा सकती है।
बायोमेट्रिक उपस्थिति, जेब रहित वस्त्र और एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी जैसे सुझाव भी शामिल हो सकते हैं।

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) बुधवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार जांच लगभग पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सरकार ने एसआईटी को रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 जुलाई तक का समय दिया था।

सूत्रों का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट में चढ़ावे के संग्रह, स्थानांतरण और गणना की प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही जांच के दौरान सामने आए कुछ तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर भी रिपोर्ट में टिप्पणी किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राज्य सरकार ने 13 जून को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में गठित इस टीम ने 15 जून से जांच शुरू की। जांच के दौरान मंदिर में चढ़ावे के संग्रहण, सुरक्षा, परिवहन और गणना से जुड़ी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया।

एसआईटी ने प्रारंभिक जांच में कई प्रक्रियागत कमियों की ओर संकेत किया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि चढ़ावे की गणना के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन पर्याप्त रूप से नहीं हुआ। इसके अलावा चढ़ावे की गणना से संबंधित व्यवस्थाओं और निगरानी प्रणाली की भी समीक्षा की गई।

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सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में मुख्य रूप से चढ़ावे के संग्रहण से लेकर गणना पूरी होने तक की पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि नकदी का स्थानांतरण, गणना और सुरक्षा व्यवस्था मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप हुई या नहीं।

जांच के दौरान यह भी देखा गया कि चढ़ावे की गणना के लिए नियुक्त कर्मियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का किस स्तर तक पालन किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में जिन प्रक्रियागत कमियों की ओर संकेत किया गया था, अंतिम रिपोर्ट में उनके संबंध में विस्तृत निष्कर्ष शामिल किए जाने की संभावना है।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 40 दिनों के दौरान चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं, गणना प्रक्रिया में गड़बड़ियों तथा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ मुद्दों का उल्लेख किया गया था। जांच के दौरान चढ़ावे की गणना में शामिल कर्मियों की कार्यप्रणाली, गणना स्थल पर प्रवेश व्यवस्था और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की गई।

प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि उसमें किन निष्कर्षों को अंतिम रूप दिया गया है और किन बिंदुओं पर आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में उन जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया जा सकता है, जो चढ़ावे के संग्रह, प्रबंधन और गणना व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी थीं। प्रारंभिक जांच में कुछ पदाधिकारियों और गणना व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।

प्रारंभिक रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्रा की जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार नकदी के संग्रहण, प्रबंधन और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी उनके पास थी। जांच दल का प्रारंभिक आकलन था कि यदि निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन होता तो कथित अनियमितताओं की संभावना कम हो सकती थी।

इसी प्रकार गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के संबंध में भी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया था कि गणना स्थल पर तैनात कर्मियों की तलाशी की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं की गई। हालांकि अंतिम रिपोर्ट में इन बिंदुओं को किस रूप में शामिल किया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच के दौरान एसआईटी ने चढ़ावे की गणना की वर्तमान व्यवस्था की भी समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार अंतिम रिपोर्ट में इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव शामिल किए जा सकते हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि विभिन्न हुंडियों में प्राप्त दान को पहले एक साथ मिला दिया जाता था और उसके बाद गणना की जाती थी। जांच दल का मानना है कि प्रत्येक हुंडी की अलग-अलग गणना किए जाने से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है और अभिलेखों का बेहतर मिलान संभव होगा। इसी आधार पर अंतिम रिपोर्ट में हुंडीवार गणना प्रणाली लागू करने की सिफारिश किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने केवल कथित अनियमितताओं की जांच ही नहीं की, बल्कि भविष्य में ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी सुझाव भी तैयार किए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • गणना कक्ष में प्रवेश और बाहर निकलने वाले प्रत्येक कर्मचारी की अनिवार्य तलाशी।
  • गणना कार्य में लगे कर्मचारियों के लिए जेब रहित वस्त्र पहनने की व्यवस्था।
  • मोबाइल फोन सहित निजी सामान को गणना कक्ष के बाहर रखने की अनिवार्यता।
  • मूल्यवर्ग के अनुसार नकदी का अलग-अलग अभिलेख तैयार करने की व्यवस्था।
  • प्रत्येक चरण का दस्तावेजीकरण और प्रमाण-पत्र तैयार करने की प्रक्रिया।
  • कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था।
  • गणना कक्ष में खाद्य एवं पेय पदार्थ ले जाने पर रोक।
  • एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी प्रणाली लागू करने का सुझाव।

यदि इन सुझावों को स्वीकार किया जाता है तो चढ़ावे की गणना और निगरानी प्रणाली में कई प्रक्रियागत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कुछ व्यक्तियों के नामों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला और मनीष यादव के संबंध में चढ़ावे की राशि हटाने और छिपाने से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय के नाम कथित रूप से सहयोग करने के संदर्भ में दर्ज किए गए थे। वहीं, रमाशंकर मिश्रा का नाम नोटों की गड्डियां छिपाने के आरोपों के संदर्भ में शामिल किया गया था।

हालांकि यह सभी उल्लेख प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का हिस्सा थे। अंतिम रिपोर्ट में किन निष्कर्षों को स्थान दिया गया है और सरकार आगे क्या निर्णय लेती है, इसका इंतजार किया जा रहा है।

एसआईटी अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद शासन स्तर पर उसका परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट में की गई सिफारिशों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की प्रशासनिक अथवा अन्य कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम रिपोर्ट के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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