नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान और इजरायल-ईरान संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय भू-राजनीतिक संकट नहीं रह गया है। इसकी सीधी कीमत भारतीय नागरिक भी चुका रहे हैं। समुद्र के बीच अपनी ड्यूटी निभा रहे भारतीय नाविक लगातार युद्ध की चपेट में आ रहे हैं। सोमवार को होर्मुज की खाड़ी में दो वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य घायल हो गए। इसके साथ ही मार्च 2026 से अब तक इस संघर्ष में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीन भारतीय अब भी लापता हैं।
यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन भारतीय परिवारों की चिंता और पीड़ा को भी सामने लाता है, जिनके सदस्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सोमवार को होर्मुज की खाड़ी में अल बहिया और मोम्बासा नामक दो वाणिज्यिक जहाजों पर हमला हुआ। दोनों जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक मौजूद थे।
हमले में अल बहिया पर तैनात एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हुआ। वहीं मोम्बासा पर सवार नौ भारतीय घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई गई है। संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास प्रभावित भारतीयों के संपर्क में है और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के बाद से अब तक 13 भारतीय नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि तीन भारतीयों का अब तक पता नहीं चल सका है।
मंत्रालय के अनुसार, अधिकांश भारतीय नागरिक ईरान की ओर से किए गए हमलों में प्रभावित हुए हैं। लगातार बढ़ रही इन घटनाओं ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है, खासकर उन नाविकों के लिए जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हैं।
ताजा घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित ईरान के उपराजदूत को तलब कर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। युद्ध शुरू होने के बाद यह दूसरा अवसर है जब भारत ने ईरानी अधिकारियों को भारतीय नागरिकों और जहाजों पर हुए हमलों को लेकर औपचारिक विरोध से अवगत कराया है। भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम कर रहे नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नागरिक नाविकों को निशाना बनाए जाने तथा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों, विशेषकर होर्मुज की खाड़ी में सुरक्षित और स्वतंत्र नौवहन में बाधा पहुंचाने वाली घटनाओं की कड़ी निंदा करता है।
उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा और सैन्य गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। भारत ने सभी संबंधित पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने और संवाद व कूटनीति के रास्ते पर लौटने की अपील भी की है, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल हो सके। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिक केवल ईरानी हमलों में ही प्रभावित नहीं हुए हैं।
जून 2026 में अमेरिकी वायु सेना ने होर्मुज मार्ग से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर कार्रवाई की थी। उस दौरान सेटलबेलो नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी।
उस घटना के बाद भारत सरकार ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को भी तलब कर विरोध दर्ज कराया था। बाद में फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के दौरान भी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया।
होर्मुज की खाड़ी दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिनी जाती है। पश्चिम एशिया से निकलने वाले ऊर्जा संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी सैन्य तनाव वैश्विक नौवहन और व्यापार पर सीधा असर डालता है।
भारतीय नाविक बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते हमले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। घायल भारतीय नागरिकों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और उनके परिजनों के साथ भी संपर्क बनाए रखा गया है। मंत्रालय ने मृतक भारतीय नाविक के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
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