UP News: सड़क हो या बाजार, महिलाओं की सुरक्षा हो या अपराध होने के बाद आरोपियों की पहचान, आम लोगों के लिए सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल, महिला सुरक्षा और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाई गई हैं। सरकार की इन पहलों का उद्देश्य पुलिस को आम लोगों के करीब लाना और अपराध से जुड़ी घटनाओं पर कार्रवाई में मदद करना है। इसके साथ ही नशे के कारोबार पर रोक लगाने, माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने और पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए भी कदम उठाए गए हैं।
अपराध होने के बाद आरोपियों की पहचान करना और जरूरी सबूत जुटाना पुलिस के लिए अहम होता है। इसी काम में सीसीटीवी कैमरे मददगार साबित हो सकते हैं। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत 10 जुलाई 2023 से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों से सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। किसी घटना के बाद फुटेज की जांच कर पुलिस संदिग्धों की पहचान करने और जांच को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।
महिलाएं अपनी परेशानी बिना किसी झिझक के पुलिस तक पहुंचा सकें, इसके लिए प्रदेश के सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और महिला बीट व्यवस्था के जरिए महिलाओं से सीधे संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 19,045 महिला पुलिसकर्मी तैनात हैं और 8,694 महिला बीटों का संचालन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं को समझना, उनकी शिकायतों पर ध्यान देना और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो अभियान के तहत भी कार्रवाई की गई है। एक अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2026 तक अभियान के दौरान 87,45,228 स्थानों पर जांच की गई। इस दौरान 4.83 करोड़ से अधिक लोगों की जांच हुई। इस अवधि में 19,554 मुकदमे दर्ज किए गए, 24,434 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई और 1.71 करोड़ से अधिक लोगों को चेतावनी दी गई। इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ और अन्य परेशानियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस की मौजूदगी बढ़ाना है।
संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई के तहत प्रदेश में चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोहों के सदस्यों व सहयोगियों पर कार्रवाई की निगरानी की गई। पुलिस के मुताबिक, 25 सितंबर 2026 तक इन मामलों में 4,558 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त या ध्वस्त की गईं अथवा अवैध कब्जे से मुक्त कराई गईं। इसके अलावा गिरोहों के करीब 1,508 सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 923 मुकदमे दर्ज किए गए। 653 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में गैंगस्टर अधिनियम, गुंडा अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई।
अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों को भी जोखिम उठाना पड़ा है। 20 मार्च 2017 से 30 सितंबर 2026 तक पुलिस के साथ मुठभेड़ में 316 अपराधियों की मौत हुई और 12,821 घायल हुए। इसी अवधि में 18 पुलिसकर्मियों की जान गई, जबकि 1,949 जवान घायल हुए। कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अपराधियों पर कार्रवाई के साथ यह भी जरूरी है कि पुलिस हर मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करे। आम लोगों के लिए सुरक्षा का मतलब केवल अपराधियों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि शिकायत सुनवाई, समय पर मदद और कानून के प्रति भरोसा भी है।
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए प्रदेश में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई गई है। गाजीपुर, बाराबंकी, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और झांसी में छह एंटी नारकोटिक्स थाने स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा आठ क्षेत्रीय परिचालन इकाइयां और नोएडा में एक उप-इकाई बनाई गई है। एक जनवरी 2022 से 27 सितंबर 2026 तक मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान में 38,625 मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार, बरामद मादक पदार्थों की अनुमानित कीमत 3,565 करोड़ रुपये से अधिक है। अवैध और जहरीली शराब के खिलाफ कार्रवाई में भी 2,89,282 मुकदमे दर्ज किए गए। बरामदगी का अनुमानित मूल्य 576 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। शराब से जुड़े मामलों में 13,257 मामलों में सजा भी दिलाई गई।
किसी इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच संपर्क भी जरूरी है। इसी उद्देकिश्य से सी-प्लान ऐप के जरिए 21,32,467 नागरिकों से संवाद किया गया। इस व्यवस्था से 1,88,532 पुलिसकर्मी जुड़े हैं। इस तरह के संवाद से स्थानीय समस्याओं और सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों को पुलिस तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उनके और उनके परिवारों के इलाज, शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा के लिए भी सहायता दी जा रही है। सरकार ने सुख-सुविधा निधि का अनुदान 3.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5.50 करोड़ रुपये और कल्याण निधि का अनुदान आठ करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया है। पुलिसकर्मियों के मेधावी बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए पुलिस शिक्षा निधि का अनुदान भी 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया गया है।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 340.92 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 127 पुलिसकर्मियों को जीवन रक्षक निधि से 4.70 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता मंजूर की गई। पुलिसकर्मियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए नकदरहित इलाज की सुविधा के तहत 4,97,992 कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस वेतन पैकेज में दुर्घटना बीमा की अधिकतम राशि 2.30 करोड़ रुपये और जीवन बीमा की राशि 20 लाख रुपये तक निर्धारित की गई है।
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