UP News: घर में बेटी की शादी हो तो परिवार के सामने कई जिम्मेदारियां आ जाती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए शादी का खर्च जुटाना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे परिवारों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक प्रदेश के 28,833 जोड़ों की शादी कराई जा चुकी है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना का मकसद जरूरतमंद परिवारों को बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद देना है, ताकि वे बिना ज्यादा आर्थिक परेशानी के विवाह की रस्में पूरी कर सकें। सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में 72,540 जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य रखा है।
योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के विवाह पर कुल एक लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। इसमें 64 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में गृहस्थी बसाने के लिए दिए जाते हैं। वहीं, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री के लिए और 15 हजार रुपये विवाह समारोह की व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं। इस मदद से परिवारों को शादी के खर्च में राहत मिल सकती है। साथ ही नवविवाहित जोड़े को नई जिंदगी शुरू करने में भी आर्थिक सहारा मिलता है।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक योजना के लिए 1,16,668 आवेदन मिल चुके हैं। इनमें से 34,845 आवेदन मंजूर किए गए हैं, जबकि जांच के दौरान 11,679 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। बाकी आवेदनों की जांच और आगे की प्रक्रिया जारी है। जिलों की बात करें तो हरदोई में सबसे ज्यादा 1,385 जोड़ों का विवाह कराया गया है। सीतापुर 1,335 जोड़ों के साथ दूसरे स्थान पर है। पीलीभीत में 1,271 और आजमगढ़ में 1,242 जोड़ों की शादी संपन्न कराई गई है।
योजना में सही लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए आवेदनों की जांच की जा रही है। इसके लिए ई-केवाईसी और ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के जरिए आय और जाति प्रमाण पत्रों का डिजिटल सत्यापन किया जाता है। पात्र लाभार्थियों को आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से सहायता राशि देने की व्यवस्था है। यह योजना उन परिवारों के लिए मददगार बन सकती है, जिनके लिए बेटी की शादी का खर्च जुटाना आसान नहीं होता। आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें विवाह की तैयारियों में राहत मिलती है और बेटी की नई गृहस्थी शुरू करने में मदद मिलती है।
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